हे स्वामी मेरे, हम पुजारी तेरे, रघुनंदन
काटो आवागमन के बंधन॥
जग के कष्टों ने मुझको है सताया,
मोह माया में मन ये फंसाया,
काटो बन्धन मेरे,हम शरण में तेरे, रघुनंदन
काटो आवागमन के बंधन॥
तेरा मेरा हैं नाता पुराना,
ये कहता है सारा जमाना,
रहूं तुझमें मगन, गाऊं तेरे भजन, रघुनंदन,
काटो आवागमन के बंधन॥
मुझको तेरा भरोसा है भारी,
छोड़ दी चिंता मैंने है सारी,
तू ही पालक मेरा, ध्यान करती तेरा, रघुनंदन,
काटो आवागमन के बंधन॥
श्यामाआई शरण में तुम्हारी,
विनती सुन लो राघव हमारी,
सारे संकट हरो,मत देरी करो, रघुनंदन,
काटो आवागमन के बंधन॥