आऊँ जो खाटू ख़ाली मुझको लौटाना नहीं
झोली को भरना आँखे चुराना नहीं
आऊँ जो खाटू ख़ाली मुझको लौटाना नहीं
सोचा है मैंने बाबा मैं भी खाटू आऊँ
दिल की कहानी सारी तुमको ही सुनाऊँ
कैसे सुनाऊं आता सुनाना नहीं
आऊ जो खाटू ख़ाली मुझको लौटाना नहीं
दुनिया के ताने सह के द्वार तेरे आया
हारे का साथी है तू नाम यही गाया
हारे हुए को बाबा हराना नहीं
रेम तुमसे कितना बाबा कैसे बताऊँ मैं
भाँवो को अपने दिल के कैसे दिखाऊँ मैं
आता अनुज को कुछ भी जताना नहीं
लेखक अनुज जैन