जिस घर के आँगन मे तेरी ज्योति निराली है

जिस घर के आँगन में  तेरी ज्योती निराली है,
हर रोज वहाँ होली हर रोज दीवाली है ॥
जिस घर............

जिस घर में हे मैया तेरा नाम चहकता है,
उस घर का हर  कोना खुशियों से मेहकता है,
उस घर पे मेहर करती तू मेहरा वाली है,
हर रोज वहाँ.........

दरिद्र भाग जाते दुःख भागे डर करके,
उस घर में नही आते दुःख कभी भूल कर के,
शेरो पे जो रहती माँ शेरो वाली है,
हर रोज वहाँ............

कैसे भी अधेरे हो येज्योति मिटाती हैं,
विस्वास जो करते है उनहे राह दिखाती है,
पावन जोती माँ की जिसने भी जगा ली है
हर रोज वहा होली..........

बेधड़क कहे लखा ममता के चुन मोती,
घर मन्दिर हो जाए श्रधा से जगहा जोती,
ममता से भरेगी माँ तेरी झोली खाली है,
हर रोज वहाँ होली.......

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