राधा रानी के नथ पे मोर नाचे
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर नाचे ॥
मोर, नाचे, चित चोर नाचे ॥
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
मोर कुटी में, राधा रानी, नाच देखने जाए ।
भात भाँत के, अन्न हाथ में, लेकर खूब खिलाए ॥
ओ मोर, हो के, अति भाव, विभोर नाचे ।
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
जब आवे, सावन मन भावन, पवन चले पुरवाई ।
तान के छत्तरी, पीहु पीहु की, मोर ने अरज़ लगाई ॥
हो छाई, घटा, घन घोर नाचे ।
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
राधा हुई, उदास एक दिन, मोर ना दियो दिखाई ।
सांवरे को, राधा जी ने, अपनी बिर्था बताई ॥
सुनकर, साँवरे के, मन में, हिलोर नाचे ।
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
बरसाने में, शोर मचो है, भीड़ लगी अति भारी ।
नाच देखकर, राज़ी हो गई, गोरी राधा प्यारी ॥
यह तो, मोर बनके, नंद का, किशोर नाचे ।
ओ राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
बन गयो मोर, बिहारी राधे, नथ पर दियो सजाए ।
पड़ा रहे, नैनो के आगे, कहीं ना आए जाए ॥
ओ गोरे, मुखड़े पे, कालज़ो, किशोर नाचे ।
राधा, रानी, की नथ पे, मोर...
अपलोडर- अनिलरामूर्तीभोपाल