कोई भाव से माँ को चुनरी चढ़ा देkoi bhaav se maa ko chunari chda de


कोई भाव से कोई प्यार से,
कोई भाव से माँ को चुनरी चढ़ा दे भाग्य जग जाएगा,
कोई भाव से मेरी मैया को मना ले भाग्य जग जाएगा ,

गंगा जल से मेरी माँ को नेहलादे,
रोली चंदन मेरी माँ को  लगा दे.
फिर प्यार से फिर प्यार से,
फिर प्यार से अडूहल का हार चढ़ा दे,
भाग्य जग जाएगा ,

कानो में आंबे माँ के कुंडल पेहनादे,
हाथो में जगदमबे के मेहँदी लगा दे,
माँ को सजा दे,
फिर प्यार से फिर प्यार से,
फिर प्यार से माँ को पायल पेहनादे,
भाग्य जग जाएगा ,

हलवा पूड़ी चने का भोग लगा दे,
साथो बहिन संग भेरो भाइयाँ को चढ़ा दे,
कुलदीप को कैलाश को ,
रगविन्दर को देवेंदर ये बता दे,
भाग्य जग जाएगा ,

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