भज ले हरी को

धुन- परदेसियों से न अख्खियाँ

भजले हरी को, एक दिन तो है जाना ll,
जीवन को यदि, सफल बनाना,
भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

किस का गुमान करे, कुछ भी न तेरा ll,
दो दिन का है यह, रैन बसेरा xll
ख़ाली हाथ आया है और, खली हाथ जाना,
भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

पांच तत्व की, बनी तेरी काया ll,
काया में तेरे, हरि है समाया xll
उसे ढूढ़ने को नहीं, दूर है जाना,
भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

ये धन दौलत, माल खज़ाना ll,
जिस पे हुआ है तूँ, इतना दीवाना xll
आज है तेरा कल का, नहीं है ठिकाना,
भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

हरि नाम की एक, ज्योति जगा ले ll,
जो कुछ किया है, उसे तूँ भुला दे xll
दास कहे गर, मुक्ति जो पाना,
भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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