सांझ ढ़लन को आई

सांझ ढ़लन को आई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई,
जीवन लौ थर थराइ,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई।

तेरी याद में पल पल रोऊँ,
मुख असुवन से मल मल धोऊं,
मेरी हुई जग हँसाई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई,
सांझ ढ़लन को आई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई।

सुनकर तेरी दया की गाथा,
तेरे दर पर टिक गया माथा,
काहे देर लगाईं,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई,
सांझ ढ़लन को आई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई।

दीवानों में नाम लिख लीज्यो,
सुन्दर लाल को शरण रख लीज्यो,
तू ही एक सहाई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई,
सांझ ढ़लन को आई,
अबहुँ नहीं आए कन्हाई।

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