मन बसिया ओ कान्हा

पवन प्रभाती जग को जगाती,
भंवरे भी करते है गुंजन,
पंख पसारे उड़े पखेरू,
सिन्दूरी सिन्दूरी आंगन,
मंगल मंगल बेला मंगल,
सौरभ सौरभ सारा भुवन,
इन चरणो में फूल चढ़ाने,
आयी तेरी राधा मोहन,
मन बसिया ओ कान्हा,
रंग रसिया ओ कान्हा।

मै बांवरिया सुध बुध भूली,
मुझको लागी तेरी लगन,
तेरे द्वारे सांझ सकारे,
तेरा नाम जपे मेरा मन,
जो है मेरा सब है तेरा,
तुझपे है ये जीवन अर्पण,
इन चरणो में फूल चढ़ाने,
आयी तेरी राधा मोहन,
मन बसिया ओ कान्हा,
रंग रसिया ओ कान्हा।

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