प्रभु मुझे कर दो रिहा

अब दुख जाए न सहा प्रभु मुझे कर दो रिहा

जिसको मैं अपना कहा वो नही मेरा है,
पीछे जो मुड़ के देखा घोर अंधेरा है,
निर्बल मन है डरा

खड़ा हूँ मैं जिस जग में बहुत बखेड़ा है,
काम क्रोध लोभ आ के चाहु दिस घेरा है,
हार के मैं तुमसे कहा,

किस मुह से दयानिधि तेरे पास आउ मैं
अपनी ही करनी पे रो रो पछताओ मैं।
फनि तो कही का न रहा

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