शंकर से कह दो कर ले श्रंगार
शंकर, से कह दो, कर ले श्रंगार,
गौरां, पहनाएगी, फूलों के हार ॥
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर के, सिर का, क्या है श्रृंगार ।
जूड़ा, जटाएं और, गंगा की धार ॥
गंगा, लहराती है, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर के, माथे का, क्या है श्रृंगार ।
चंदन, लगाए और, चंदा उजियार ॥
चंदा, से उजाला है, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर, के गले का, क्या है श्रृंगार ।
बिच्छू, ततैया और, सपों के हार ॥
सर्प, लहराते हैं, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर, के हाथों का, क्या है श्रंगार ।
त्रिशूल, कमण्डल और डमरू की तान ॥
तान, मस्तानी है, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर, के पैरों का, क्या है श्रंगार ।
धुल, खड़ाऊँ और, मस्तानी चाल ॥
चाल, मस्तानी है, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर, के अंगों का, क्या है श्रंगार ।
बाघंबर, शाला और, भस्मी आपार ॥
रूप, मस्ताना है, भोले नाथ जी ।
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
शंकर, से कह दो, कर ले श्रंगार,
गौरां, पहनाएगी, फूलों के हार ॥
गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल