तर्ज: ए मेरे दिल ए नादान...
जब बाबा बैठा है, क्या चिंता है प्यारे
हारा है तू लेकिन, मेरे श्याम नही हारे
माना तेरे सर पर तो, दुखो का समंदर है
घनघोर अंधेरा है, पग पग पे बवंडर है
ये मोरछड़ी ले कर, हर संकट को टारे
जब बाबा बैठा है...
रिश्ता तू बना इनसे, रिश्ता ना ये तोड़ेंगे
सारी दुनिया भले छोड़े, तुझे श्याम ना छोडेंगे
अपने प्रेमी को श्याम, कभी ठोकर ना मारे
जब बाबा बैठा है...
तुझसे भी हारे का, बने श्याम सहारा है
तू तो अभी डूबा नही, डूबे को भी तारा है
क्या चिंता है गोपाल, करते वारे न्यारे
जब बाबा बैठा है...