आजा रे कन्हैया आजा रे

आजा रे कन्हैया आजा रे

मेरे, मन की, शहनाई, रो रो के, तुझे पुकारे x॥
( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥) ॥

कभी ये, बजा करती थी, अपनी ही धुन में ।
खिलते थे, फूल मेरे, मन उपवन में ॥
सुर भी, आज पड़े हैं मध्यम, ये सारे के सारे x॥
( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)
मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...

आज, बज रही है ये तो, जग के इशारो पे ।
तुझ पर, असर नहीं होगा, इसकी पुकारों से ॥
कोई, ख़ुशी के, कोई गम के, करता इसे ईशारे x॥
( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)
मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...

गाती, रही है ये तो, गीत बेबसी के ।
गाएगी, कब ये मोहन, गीत ख़ुशी के ॥
बाट उडीके, तेरी संजू, हर दिन साँझ सकारे x॥
( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)
मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...
हर हर महाँदेव
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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