राधारमण रंगीले ठाकुर,
तुम हो रसिकों के सिरताज,
रसिकों के सिरताज,
तुम हो राखो सबकी लाज,
राधारमण रंगीले.....
मोर मुकुट की छवि निराली,
हाथ बांसुरिया है मतवाली,
कमर पे करधनी लटक रही तेरे,
सिर पे सोहे ताज,
राधारमण रंगीले...........
पीताम्बर पट पीत बिराजे,
गल बैजन्ती माला साजे,
ठुमक ठुमक के जब चलत हो,
पग नुपुर रही बाज,
राधारमण रंगीले...........
तरह तरह के पहरों पटके,
जो दर्शन करें तुमपर अटके,
दीनो के हो सदा सहाई,
तुम हो गरीब निवाज ,
राधारमण रंगीले...........
राधा संग दिल में बस जाओ,
चरणों की मुझे दासी बनाओ,
हाथ पकड़ लो मेरा प्यारे,
बिगड़े संवारो काज,
राधारमण रंगीले...........
अंशु गिरी कोटकपूरा पंजाब