तरज़-कैसे ना इठलाऊं मैं बरसाना मिला है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
सब सुख सदन बदन तुव राधे।
उपमा कमल ससी नहिं पावक,
मीत मान अपराधे
मृदु मुसक्यानि हरत मन नैंनन,
बंक बिलोकन ही दृग आधे।
लेत बलाय दुहुं कर भगवत,रसिक
सिरोमनि गुननि अगाधे॥
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
किशोरी मोहे कब अपनावोगी।
निज कर कमल फेर मस्तक पर,
कब बृज़वास करावोगी॥
सुंदर रूप स्वरूप अपनो,
कबते मोहि दिखावोग।
अलिकिशोरी नाम सांचो कर,
रसिकन मांय मिलावोगी॥
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
रे मन श्री वृन्दावन चल।
यमुना सरस सुखद अति सोहे,
नीर बहै कल-कल॥
जहां बिराजत राधारानी,
लिये सहचरी दल।
हितगोपाल को प्राण-प्रिया के,
चरण कमल को बल॥
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
हमारौ धन श्री वृन्दावन प्यारी।
खरचत खात घटत नहीं कबहू,
बाढ़त छिंन-छिंन अति अधिकारी॥
ताहीं को अभिमान सदाई,
ताहीं बल वश श्री कुंजबिहारी।
श्री हरिदास जू रसिक सिरोमनि,
प्राण-प्राण मिल कीनी यारी॥
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
ऐसौ स्वपन मोहि अति भावै।
नैंन समीप मोहिनी मुरत,
मंद-मंद मुसिकावै॥
कोटि चंद छविं सुन्दर आनन,
रूप सुधा बरसावै।
भोरी रंग भरी अलबेली,
हिय में आइ समावै॥
मस्त हुआ है मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
कर करूणा की कौर लाड़ली,
नाम रसका अब अमृत देवौ बहा
प्रेम समन्दर तेरे पास में,भरा पड़ा है
अथा धसका की अभिलाष यही है,
हर मन की यही चाहा
मस्त हुआ है,मन मस्त हुआ है
श्री राधा नाम में मेरा,मन मस्त हुआ है...
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000