मुझे अपना जीवन बनाना आया

बौल-जो सुख होत गोपाल ही गाये
  सो नहीं होत किये जप-तप ते, कोटिक तीरथ नहाये            
  दिये लेत नहीं चार पदार्थ,जानें चरण कमल चीत लाये    

  तीन लोक त्रींणकर सम लेख़त,
जाके नंदनन्दन उर्र आये
  बंसीवट गोकुल श्री यमुना,
तज वैकुंठ को जाये  
  सुरदास हरि को सुमिरन कर,
बहुर ना भव चली आये                  
  जो सुख होत गोपाल ही गाये सो
नहीं होत किये जप-तप ते,  
  कोटिक तीरथ नहाये मुझे
ऐ श्याम वो दिल दे,के
जिसमें प्यार तेरा हो    
  ज़ुबां वो दे जो करती हर समय,
  इज़हार तेरा हो  

  मुझे वो बख़्श दे आंखें,
जिन्हें हो जुस्तजू तेरी      
  के ज़र्रे-ज़र्रे में जिनकों,
फ़कत दिदार तेरा हो    
  मेरा साथी ज़माने में बनना,
उसको हे भगवान          
  दया हो जिसके सिनें में,
और सेवादार तेरा हो  
  ये प्रेमी काट ही लेगा,
ख़ुशी से ज़िन्दगी के दिन
  मेरे सिर पर कृपा हाथ,
जब सरकार  तेरा हो          
  ख़ता वो क्या करेगा श्याम,
के जिसका तुं हैं निगेहबां          
  इश्क़ का ऐसा दे इक ज़ाम,
जिसमें सरूर तेरा हो  
  मुझे ऐ श्याम वो दिल दे,
के जिसमें  प्यार तेरा हो            
 ज़ुबां वो दे जो करती हर समय,
  इज़हार तेरा हो            
  मुझे अपना जीवन बनाना आया,
  रूठे हरि को मनाना आया
  मुझे अपना जीवन....    

भटकती रही दुनिया वालों के दर पर,            
   रही पाप डोती मैं सारी उमर भर
   जगत के प्रभु को,रिझाना ना आया
   रूठे हरि को मनाना आया,    
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....          

ये जग है सराहे सभी को है जाना,
   यहां रहने वालों से दिल ना लगाना
   प्रभु चरणों में मन लगाना ना आया,
   रूठे हरि को मनाना आया    
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....    

समझ ना सकी मैं हरि की ये माया,
   युहीं अपने दिल को हर इक में फंसाया        
   फंसा दिल जगत में छुड़ाना ना
   आया,रूठे हरि को मनाना आया  
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....  

किसी काम आई ना मेरी कमाई,
   प्रभु नाम बिन युहीं आयू गवांई
   हरि नाम का धन कमाना ना आया,
   रूठे हरि को मनाना आया    
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....    

कभी याद आई ना प्रभु की मुझको,
   हे जिसकी बदोलत ये सारी ख़ुदाई
   उसी प्रभु का गीत गाना आया,रूठे
   हरि को मनाना आया
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....    

   उन्हीं की शरणं में मिलेगा ठिकाना,
   होजा मन मेरे तूं प्रभु का दिवाना
   प्रभु दर पे सिस झुकाना आया,
   रूठे हरि को मनाना आया    
   मुझे अपना जीवन बनाना आया....
   भज गोबिंद गोबिंद गोपाला,भज
   मुरली मनोहर नंदलाला  

     बाबा धसका पागल पानीपत
     संपर्कंसुत्र-7206526000

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