तै आ वो दाई

तै आ वो दाई...तै आ वो दुर्गा... ॥
बैरी के नाश करे बर,दुःखिया के दुःख ल हरे बर ॥

धरती के भार उतारो वो दाई,ना न रूप ल धरके
त्राहि त्राहि जीव जंतु हे,आजा बघवा म चड़के
भगतन के लाज रखेबर,असुरन संघार करे बर ॥

घना घोर बदरा छाये हे,पाप हे चारो डहर म ।
तोला गोहरावत हव दाई, नाव बसे हे अधर म ।
जग म उजियार करे बर, बिगड़ी सब काज करे बर ॥

बगुला मुखी बमलाई दाई, रतनपुर के महामाई वो ।
आजा आजा बूढ़ी माई,सुनके जग करलाई वो ।
तै फेर अवतार धरे बर, सबके उद्धार करेबर ॥

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