भैंरु जी मतवाला थे जग का रखवाला

तर्ज : ये रेशमी ज़ुल्फें

भैंरु जी मतवाला थे जग का रखवाला
मेरी नाव को भी संभालो जरा

बाबा रींगस में थारो धाम है
सारी दुनिया में थारो नाम है
काम मेरा भी बन जाए बंद नसीबा खुल जाए
पतवार को भंवर से निकालो जरा ...

सारी दुनिया का ठुकराया हूं
मैं गिरते संभलते आया हूं
उम्मींद मेरी अब टूटे ना और द्वार तेरा यह छूटे ना
संकट से मुझे अब बचा लो जरा ...

कोई पैदल चल कर आता है
कोई पेट पलनियाँ आता है
अपनी अपनी श्रृद्धा है अपनी अपनी विपदा है
दुविधा दास की अब हटा लो जरा ...

सारी दुनिया से नाता तोड़ लिया
खुद को तेरे दर से जोड़ लिया
शर्मा दर पे आया है सैनी शीश झुकाया है
अर्ज है चरणों से अब लगा लो जरा...

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