तुम्हारी चाहत में हो के पागल, गली गली में भटक रही हूँ

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन ,
हर एक जगह पे ढूंढ रही हूँ ,

पता बता दो तो मिलने आऊ ,
हाल ये दिल का तुम्हे सुनाऊ ,
ना बढ़ाओ मुझसे यूं दुरी मोहन ,
हाथ जोड़कर ये कह रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या मैं करू जो तुम मान जाओ ,
पास में अपने मुझे बुलाओ ,
कोई तो राह बता दो मोहन ,
हाथ जोड़कर में पूछ रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या कुछ तुमसे छुपा हैं मोहन ,
तेरे भरोसे हैं मेरा जीवन ,
जनम जनम से हूँ मैं तो प्यासी ,
जनम जनम से हूँ तेरी दासी ,
दरश को तेरे तरस रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

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