राम नाम की ज्योत जला

राम नाम की ज्योत जला,
मन का अँधेरा दूर भगा
राम नाम की ज्योत जला,
मेरी हर साँस में राम बसा

भटका जग में दर-दर मैं,
सुख का कोई ठौर न मिला
नाम लिया जब राम का,
भीतर ही उजियारा मिला॥

अब तो मन पुकारे बस, राम तेरा ही नाम सदा
जब अंतर में दीप जला, मिट जाए मेरी हर व्यथा

माया के सब खेल यहाँ,
झूठी सारी ये दुनिया
राम सुमिरन जो कर लिया,
सच्ची हो गई हर धुनिया॥

जब भी अँधियारा छाए, याद तेरा ही नाम आए
राम की लौ जल उठे, मन मैं उजियारा हो जाये

राम नाम की ज्योत जला
राम नाम की ज्योत जला
राम नाम की ज्योत जला

Writer : Marudhun Studios
Emai।: marudhunstudios@gmai।com

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