आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं
सब लोग है अपने मतलब के,
दुनिया में किसी का कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं...
1.जब पैसा हमारे पास में था,
तब दोस्त हमारे लाखो थे
जब वक्त पड़ा था मुश्किल का,
तब पूछने वाला कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं
सब लोग है अपने मतलब के,
दुनिया में किसी का कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं...
2.माँ बाप त्रीया और पुत्रवधु ,
मतलब के है सब ही नाते
जब हसने वाले लाखो थे,
अब रोने वाला कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं
सब लोग है अपने मतलब के,
दुनिया में किसी का कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं...
3.कल बाग़ जो था फूलो से भरा,
इठलाती हुई चलती थी हवा
उस सम्बल गुल का जिकरा क्या,
है खाक दरेबा कुछ भी नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं
सब लोग है अपने मतलब के,
दुनिया में किसी का कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं...
4.ए बिंदु क्यों नाहक रोता है,
तू होगा फ़ना इस बाग़ में कल
रोना तेरा बेकार है सब,
मिटटी में भरोसा कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं
सब लोग है अपने मतलब के,
दुनिया में किसी का कोई नहीं
आराम के साथी क्या क्या थे,
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं...
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000