सतगुरु की बलिहारी,मैं तो सतगुरु की
बलिहारी
जिनसें मिली है मुझको,हरि की भक्ति
प्यारी सतगुरु की बलिहारी,
मैं तो सतगुरु की बलिहारी...
मन पपीहा बहु दिन को प्यासो,
रटत-रटत हो गयो निराशो
तब स्वातिं बुंंद मुख डारी,
मैं तो सतगुरु की बलिहारी
सतगुरु की बलिहारी...
गुंगा गुड़ सब कहत बनें ना,
ऐब इदम कब कछु कम है ना
ऐसी रहंन हमारी,मैं तो सतगुरु की
बलिहारी
सतगुरु की बलिहारी...
जैसे बिंन्दू में सिंन्दू समाया,
क्यों मुझमें ही कृष्ण लख़ाया
ऐसे खेल खिलाड़ी,मैं तो सतगुरु की
बलिहारी
सतगुरु की बलिहारी...
बाबा धसका पागल पानीपत
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