अरे रे मेरे मदन गोपाल तेरो नचायो ना ना -ना मेरे गिरधर लाल तेरो नचायो नाचूं
तेरे घर में रहूँ निरंतर, तेरो हुक्म बजाऊ ँ मेरे प्यारे तेरे धन से, तेरे जन की सेवा म ै ं बजाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
तेरो ध्यान धरूँ निशि-दिन, तेरो ही दास कहाऊ ँ मेरे प्यारे तेरे पद पंकज की रज को, अपने शीश चढ़ाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
रूखा-सूखा जो कछु देवे, वाही को भोग लगाऊ ँ मेरे प्यारे खीर परोसे या छाछ राबड़ी, बड ़ े प्रेम से खाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
घर के प्राणी कछु ना माने, मन ही खुशी मनाऊ ँ मेरे प्यारे तेरी मन-चाही में प्यारे, मैं क्यूँ टांग अड़ाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
जीवन सौंप दिया ह ै तुमको, तेरी शरण मे ं आऊ ँ मेरे प्यारे कृपा राखियो प्यारे तेरी, नित उठ दर्शन पाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
जो तू कोस-पाँच ले जावे, दौड़ा-दौड़ा जाऊ ँ मेरे प्यारे जो तू आसन मार बैठा, तेरो ही ध्यान लगाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
जैस े कपड़ा तू पहनावे, तैसे म ै ं बन जाऊ ँ मेरे प्यारे जैस े मुख से बोल बुलावे, वैसे बोल सुनाऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं
जो तू तन को रोग लगावे, ओ सो जाऊ ँ मेरे प्यारे जो तू काल-बल बन आवे, लपक गोद मे ं आऊँ अरे रे मेरे मदन गोपाल, तेरो नचायो नाचूं