मेरी एक चिट्ठी सांवरिया के धाम पहुँचा देना
मेरे दिल की हर इक बात जाकर उन्हें बता देना
ये एक दीवाने की अर्जी है
आगे तुम्हारी मर्जी है
सुनता हूँ दरबार से उनके , कोई खाली जाता नहीं
जो भी जाता मंडफिया मे , निराश होकर आता नहीं
मैं भी बैठा आस लगाए, दर्शन मुझे दिखा देना
मेरे दिल की हर इक बात जाकर उन्हें बता देना।
ये एक दीवाने की अर्जी है
आगे तुम्हारी मर्जी है
लाखों भक्त दर्शन को जाते, साँवरिया के द्वार पे
अपना सब कुछ वार देते है उस प्यारे सरकार पे
मुझे भी अपने दर पे बुलाले अर्जी ना ठुकरा देना
दिल की हर इक बात जाकर उन्हें बता देना।
ये एक दीवाने की अर्जी है
आगे तुम्हारी मर्जी है
मेने इस चिट्टी मे लिखें, मेरे दिल के जज्बात है
जाने वाले जाकर देना, मेरे साँवरिया के हाथ है
दिलबर तेरी याद मे रोये,एक बार गले लगा लेना
मेरे दिल की हर इक बात जाकर उन्हें बता देना।
ये एक दीवाने की अर्जी है
आगे तुम्हारी मर्जी है
!! रचनाकार एवं प्रेषक !!
दिलीप सिंह सिसोदिया दिलबर
नागदा जंक्शन म. प्र.