हाय हाय रसिक रसिया नही लागे जीया

हाय हाय रसिक रसिया, नहीं लागे तेरे बिन जिया — हाए हाए
ओ तूने पागल बनाया, ऐसा चक्कर चलाया
जाने कैसा सितम कर दिया, हाय हाय हाय हाय
हाय हाय रसिक…………॥

बलिहारी तेरी छटाओ पे, तेरी तिरछी निगाहों पे — ओ
कुर्बान तेरी अदाओं पे, और तेरी वफाओं पे — ओ
तेरे दिल में समाया, मेरे दिल में समाया
तूने ऐसा सितम कर दिया, हाय हाय हाय हाय
हाय हाय रसिक…………॥

तिरछी नजरिया के मारे हम, तेरे बिना बेसहारे हम — ओ
द्वारे पे कब से पुकारे हम, कब से खड़े तेरे द्वारे हम
तेरे दर्शन को आया, तूने चक्कर चलाया
मेरा दिल तो चुरा ही लिया, हाय हाय हाय हाय
हाय हाय रसिक…………॥

सूरतिया दिल में समाई है, देखा जब से कन्हाई है
आँखों की निंदिय उड़ाई है, सुध तन की बिसराई है
रंग तेरा चढ़ाया, रग रग में समाया
ये तन मन तुझे दे दिया, हाय हाय हाय हाय
हाय हाय रसिक…………॥

ये रसिया रस का रसिला है, रस की रसीली इसकी लीला है
राधा के रंग का रंगीला है, हठ का बड़ा ही हठीला है
रस पागल को भाया, तेरे दर्शन को आया
तूने इतना विलम्ब क्यों किया, हाय हाय हाय हाय
हाय हाय रसिक…………॥

श्री हाउ बिलाउ जी महाराज
विष्णु भैया जी श्याम सखा
सम्पर्क सूत्र:-7500580057

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