मेरी एक विनय सुन लो

दोहा : आंसू लेकर आ गया, तेरे पावन द्वार।
तेरे बिन कोई है नही, मेरी लाडली सरकार॥

टेक
मेरी एक विनय सुन लो, मेरी लाडली सरकार।
मेरे जीवन की नैया का —2 श्री चरणों में उद्धार।
मेरी एक विनय...
मेरी लाडली सरकार, मेरी श्यामा जू सरकार॥

दुनिया ने ठुकराया मुझको, अपना कोई नहीं रहा।
दर्द भरा ये मन मेरा, चुपके-चुपके रोता रहा।
टूट गई हर आसा मेरी-2 तू ही एक आधार।
मेरी लाडली सरकार, मेरी श्यामा जू सरकार॥
मेरी एक विनय...॥

जब-जब जग ने दर्द दिया है, तेरा नाम लिया मैंने।
आँसू बनकर पीड़ा बहती, दिल में तुझको जिया मैंने।
मुझसे रूठो मति लाडली-2 कर दो भव से पार।
मेरी लाडली सरकार, मेरी श्यामा जू सरकार॥
मेरी एक विनय...॥

जीवन की इस डगर पे लाडो, थककर मैं गिर जाता हूँ।
मुझमें कोई गुण नहीं श्यामा, फिर भी तेरा कहलाता हूँ।
टूट चुका है मन का दर्पण-2 बिखरे सारे ख्वाब।
मेरी लाडली सरकार, मेरी श्यामा जू सरकार॥
मेरी एक विनय...॥

रो-रो कर ये नैन थक गए, फिर भी दर्द नहीं जाए।
मन की पीड़ा किससे कह दूँ, कोई समझ नहीं पाए।
विष्णु सोमेंद्र श्याम सखा की-2 सुनलो सुनलो ना सरकार।
मेरी लाडली सरकार, मेरी श्यामा जू सरकार॥
मेरी एक विनय...॥

भजन लेखक और गायक
विष्णु भैया जी श्याम सखा
सम्पर्क सूत्र:-7500580057

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