खाटू श्याम बाबा की अमर कहानी

नहीं कलयुग मैं कोई ऐसा जैसा है शीश का दानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

जब उमर थी चौदह बरस की
शिव से वरदान था पाया
चल पड़े थे युद्ध को लड़ने था तीर कमान उठाया
रस्ते में कृष्ण ने रोका , इनकी शक्ति पहचानी
माता का वचन निभाया , है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम )
( बनते उनके बिगड़े काम )

माँ ने ये वचन लिया था , हारे का साथ निभाना
जो शरण में तेरी आए , तू उसका मान बड़ाना
तूने माँ की लाज रखी थी और बात थी उनकी मानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम )
( बनते उनके बिगड़े काम )

एक बाण से भेद दिए थे पीपल के पते सारे
हैरान थे कृष्ण मुरारी अब कौन जो युद्ध ये हारे
पांडव हो चाहे कौरव दोनों ही थे अभिमानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम )
( बनते उनके बिगड़े काम )

मुझे शीश दान में दे दो बोले ये कृष्ण मुरारी
वरना निर्णय ना होगा किसने बाजी ये हारी
और दान शीश का देकर कहलाये शीश के दानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम )
( बनते उनके बिगड़े काम )

(5) दे शीश दान कर बोले विनती है कृष्ण मुरारी
युद्ध देखूँ इन आँखो से गर आज्ञा होगी तुम्हारी
कुरुक्षेत्र की इस धरती पर
तेरी महिमा जाये बखानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम )
( बनते उनके बिगड़े काम )

खुश हो के बोले कन्हैया तुमसा ना कोई दानी
कलयुग में गायेंगे सब तेरी ये अमर कहानी
पूजे जाओ कलयुग में और बन जाओ गे वरदानी
माता का वचन निभाया है इनकी अमर कहानी

( जो भी जाये खाटूधाम ( बनते उनके बिगड़े काम )

खाटू में श्याम विराजे है कलयुग के अवतारी
जो भी है शरण में आया किस्मत है उसकी संवारी
कहते हारे का सहारा कटते संकट है भारी
बाबा तेरा अनुज है लिखता तेरी ये अमर कहानी

आशु समाना पंजाब
लेखक अनुज जैन