बिना प्रेम धीरज नहीं

बिना प्रेम धीरज नहीं,
बिरह बिना बैराग..
सतगुरु बिना ना छुटिहै, मन मनसा की दाग
बिना प्रेम धीरज नहीं ..

नैना नीर भर नाइ आँख
रहत बसे निस जाम
पपीहा ज्यूँ पीहू पीहू करे ...
कब मिल होंगे त्राण.. त्राण..त्राण
बिना प्रेम धीरज नहीं ..

आई ना सकु तुझपे
सकु ना तुझ बुलाई
जियरा युही लैहु उड़ी..
बिरह तपाई ..तपाई ..तपाई..
बिना प्रेम धीरज नहीं ..

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