ब्रज के नंद लाला

दोहा-- डरते रहो ये जिंदगी बेकार ना होजाये,
सपने में किसी जीवका अपकार ना होजाये,
ये मेला है बस दो दिनका कुछ कर चलिए कुछ कर चलिए
एक दिलकी हुकूमत बस्ती है सुल्तान बदलते रहते है,
रे भोले मानव पागल तू क्यों मरता है वरदानों पे
बलिदान ही जिंदा रेहती है बरदान बदलते रेहते है,
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ब्रज के नंद लाला राधा जीके सांवरिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया,

मीरा पुकारी तुम्हे गिरिधर गोपाला,
ढल गया अमृत में. विष का भरा प्याला,
कौन मिटाए उसे, जिसे तू राख लिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥

जब तेरी गोकुल में आई बिपदा भारी,
एक इशारे पे. टारि विपदा सारी,
मुड़ गया गोवर्धन जिसे तुने उठा लिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया,

नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी,
सुध बिसराए गई. मुरली की धुन प्यारी,
मेरे मन मंदिर में रास रचाजा रसिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया,

देख रहे हो तुम मेरे दुखड़े सारे
कब दर्सन दोगे. मेरी आँखोंके तारे,
अधर पे मुरली है कांधे पे कामलिया
सब दुख दूर हुए जब तेरा नाम लिया,

हेमकांत झा प्यासा
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