छुक छुक रेल चली खाटू धाम

छुक छुक रेल चली खाटू रिंग्स धाम रे
इक बार जो खाटू पहुंचा बन गए उस के काम रे
छुक छुक रेल चली खाटू धाम


फागुन में खाटू में लगता श्याम प्रभु का मेला
कोई ले परिवार चला कोई चल दिया एक अकेला
केसरियां निशान लिए जाती भगतो की टोली
हो तकदीर वाले की खेले श्याम संग में होली
टिकट कटा लो रिजर्वेशन अपने अपने नाम रे
इक बार जो खाटू पुहंचा  बन गए उस के काम रे
छुक छुक रेल चली खाटू धाम

छोटे छोटे बचो मम्मी पापा को पटा लो
श्याम रंग बरसे खाटू में रंगला चुनरी चोला
भगती रंग में रंग देगा श्याम बड़ा अलबेला
वर्ष वर्ष की थकन मिटे गी मिल जाए आराम रे
इक बार जो खाटू पुहंचा  बन गए उस के काम रे
छुक छुक रेल चली खाटू धाम

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