कैसे ना इठलाऊं मैं बरसाना मिला है

कैसे ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है
बरसाना मिला है,रह जाना मिला है
कैसे ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है...

जप तप साधन के बस की नहीं है,
केवल किशोरी जी करुणामई है
रोम रोम ये खिला है,बरसाना मिला है
कैसे ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है...
 
तेरी कृपा से बरसाने आना बना,
तेरी रहमत जो देखी दीवाना बना
एक झलक जिसने भी देख ली आपका,
वही पागल हुआ दिवाना बना
जबसे मेरा बरसाने में,आना जाना हो गया
राधे राधे सुनते सुनते,यह दिल दिवाना हो गया
कैसे ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है...

सोचने से पहले होता प्रबंन्ध है,
कैसे बताऊं आनंद ही आनंद है
शिकवा न कोई गिला है,बरसाना मिला है
कैसे ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है...

किसी को जमाने की,शौहरत मिली है
मैं तो अपने मुकद्दर पे,कुर्बान जाऊं
मुझे मेरी श्यामा की,चौखट मिली है
क्यों ना इठलाऊं मैं,बरसाना मिला है
कैसे ना इठलाऊं मैं, बरसाना मिला है...

वृज वासी के टुकड़ों,पे पले हरी दासी
संतों के पीछे पीछे,चले हरी दासी
जीवन का यही सिला है,बरसाना मिला है
कैसे ना इठलाऊं मैं बरसाना मिला है...

बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000

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