ओ कान्हा रे तेरे बिना भी क्या जीना

ओ कान्हा रे, तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
फूलों में कलियों में , वृंदावन की गलियों में ,
तेरे बिना कुछ कहीं ना , तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,

जाने कैसे अनजाने ही, आन बसे मेरे मन में,
अपना सब कुछ खो बैठा मैं ,जब से बसे मेरे दिल में,
भक्ति के अफसाने, मैं जानू तू जाने , और ये जाने कोई ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,

मेरी धड़कन में बसे हो, सांसों में तेरी खुशबू है,
इस धरती से उस अंबर तक, मेरी नजर में तू ही तू है,
भक्ति ये छूटे ना , तू मुझसे रूठे ना, साथ ये छूटे कभी ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,

तुम बिन सुना मेरा जीवन , तुम बिन सुने दिन ये सारे,
मेरा जीवन तुझको अर्पण, तुम ही हो जीने के सहारे,
तेरे बिना मेरी ,मेरे बिना तेरी , ये जिंदगी जिंदगी ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

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