गया जब मैं खाटू

गया जब मै खाटू सब हार कर
गले से लगाया बाबा पुचकार कर

जहां में अकेला सा जब हो गया था
जो नहीं होना था वो सब हो गया था
तेरे दर पे आया बाबा–2 थक हार कर
गया जब मै खाटू सब हार कर

चौखट तुम्हारी बाबा जबसे मिली है
जीवन की बगिया मेरी तबसे खिली है
नजरे कृपा की कर दी–2 परिवार पर
गया जब मै खाटू सब हार कर

सेवा में तेरी मैं हरदम रहूंगा
कृपा की जो तूने वो सबसे कहूंगा
दास कन्हैया को–2 स्वीकार कर
गया जब मै खाटू सब हार कर
गले से लगाया-2 पुचकार कर

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