भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है।

तर्ज:- लगन तुमसे लगा बैठे...

भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है
भोले के भोग लगाना है, भक्ति में डूब जाना है-2

भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है

भोले हैं देव देवों के, नाम महादेव है इनका
काल भी क्या बिगाड़ेगा, ईष्ट महाकाल है जिनका-2
शिवालय खूब सजवाओ, आज शिव को मनाना है
भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है

चढाए आक बील धतुरा, भोले को भगत भाते है
नज़र भोले की पड़ जाए, रोग दुख मिट ही जाते हैं-2
मुझे भोले के चरणों में, मेरा सब कुछ लुटाना है
भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है

शशि है भाल पे जिनके, गले में नाग की माला
गौरजां वाम अंग राजे, जटा में गंग की धारा -2
दया करुणा के सागर है, लुटा देते खजाना है
भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है

लगे मुझे राम भी प्यारे, लगे मुझे श्याम भी प्यारे
लगे जगदम्बा भी प्यारी, मेरे हनुमान भी प्यारे-2
मगर जो इनके प्यारे है, सुभाष उनको मनाना है

भगत रे भांग घुटवाओ, भोले के भोग लगाना है

प्रेषक/लिरिक्स
सुभाष चंद्र पारीक

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