ऐसा लगाया चसका,श्री राधा नाम रसका
करूं कैसे शुक्रिया मैं,बृजराज चरण रज का
ऐसा लगाया चसका...
शामा छवि तुम्हारी,अमृत लुटा रही है 2
मदमस्त पी रहा हूं,दीवाना बनके बृज का
करुं कैसे शुक्रिया मैं,बृजराज चरण रज का
ऐसा लगाया चसका...
मेरा रोम रोम पुलकित,अनुभूति सुखद मन में 2
मैं गुलाम बन गया हूं,तेरे महल के ध्वज का
करूं कैसे शुक्रिया मैं,बृजराज चरण रज का
ऐसा लगाया चसका...
जी भी ना पाऐगें हम,तुम से बिछुड़ के राधा
चाकर बनाए रखना,मुझको प्रिया चरण का
करूं कैसे शुक्रिया मैं,बृजराज चरण रज का
ऐसा लगाया चसका...
निद्धीवन मे सेवा कुंज मे,बृज की लतन पतन में
गाऊं मैं राधा राधा,छूटे ख्याल जग का
करूं शुक्रिया मैं,बृजराज चरण रज का
ऐसा लगाया चसका...
राजीव लोचनो के,जब भी किवाड़ मूंदे
अंसुवन की धार में भी,हो दर्श राधा घन का
करूं कैसे शुक्रिया मैं,बृजरज चरण रज
ऐसा लगाया चसका...
रचना-राजीव शास्त्री जी(सोनीपत)
गायक-रसिक पागल मामा
संपर्कंसुत्र-9991515880