रोता है क्यूँ तु बावरे

रोता है क्यूँ तु बावरे... रख तो ज़रा सबर...
दिनों का नाथ साँवरा...लेगा तेरी खबर...

कोई यहां नहीं तेरा...आंशु जो पोछ दे...
इस जग की रित है यही...इतना तु सोच ले...
दुनियां को भुल श्याम से...बस तु उम्मीद कर...

सेठों का सेठ है यहां...बैठा जो सामने...
ज़िनको भी देखो वो यहां...आता है मांगने...
राजा हो य़ा हो रंक वो...मांगे है बे फिकर...

दर दर झुकाना शिश को... अच्छा नहीं कहीं...
करता जो भगतों की फिकर...दातार है वही...
इनकी कृपा हुई तभी...आया तु द्वार पर...

इस दर की बात क्या कहुँ...आया जो हार कर...
हारे का साथी श्याम है...लिखा है द्वार पर...
कैलाश पे यकीन कर...चौखट पे रख दे सर...