दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम के चरणों में जो भी आ गए
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम का सुमिरन किया था शबरी ने,
झूठे बेरों में प्रभु मेरे आ गए,
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम का सुमिरन किया था मीरा बाई ने,
ज़हर में अमृत बन प्रभु आ गए,
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम का सुमिरन किया था प्रह्लाद ने,
गरम खंभे में प्रभु मेरे आ गए,
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम का सुमिरन किया था हनुमान ने,
दिल में बसकर प्रभु मेरे आ गए,
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए

राम का मुखड़ा है श्री राम का
छोड़वी का चांद वी शर्मा गए
कुल जहां की नेमतें वो पा गए

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