ये शहर वाली रे,होरी खेले आये हे हमर गांव म,
ये शहर वाली रे, होरी खेले आये हमर गांव म,
होरी खेले आये हे हमर गांव म,
बड़ दिन म आये हे हमर गांव म,
ये शहर वाली रे...
हा गांव ल छोड़ के टुरी, रइथे शहर म
नौकरी वाली दाई, ददा के चक्कर म
देखे नई रेहेव येला होगे बर बच्छर म
दिखत हे रूप के रानी बाली उमर म
ऐ मारोव पिचकारी आज भर भर के...2
ये शहर वाली रे...
हा पड़े लिखें हन एके स्कूल म,
ऐकर मया ल कइसे भूलव ना,
देखे हासी मोला खिल खिलना
मया दिए रेहेव महू येलना,
ये कर देयेव येला मै तर तर ले...2
ये शहर वाली रे...
हा चारोमुड़ा माते हावे,होरी के हुड़दंग म
रंग मा सनाये हे सबो जी संग म
बड़ दिन म मिले हे आज ये उमंग म,
कराथे दीवानी ये मोला पसंद न,
गोरी ले करव आज कारी रे... 2
ये शहर वाली रे...