भगवे के, तिलक के, और बस एक नाम के,
हम हैं दीवाने - दीवाने श्रीराम के,
जो राम के नहीं, ना हमारे किसी काम के,
हम हैं दीवाने - दीवाने श्रीराम के,
न मरने से डरते, ना मारने से डरते हैं,
जब धर्म हो संकट में तो, हथियार बात करते हैं,
हम प्राण भी दे सकते हैं धर्म के संग्राम में,
हम हैं दीवाने - दीवाने श्रीराम के।
कईयों को यह चुभेंगे पर, मेरे निजी विचार हैं,
कुछ ऐसे दोगले हैं, करें धर्म का व्यापार हैं,
सनातन को लगा दीमक, हिंदुत्व के गद्दार हैं,
खाल पहने सिंह की, अंदर से वह सियार है,
राम नाम लेने में, जो करते परन्तु किन्तु है,
खून खौल उठता, जब कहते वह हिंदू है,
उनका न है कसूर, जो यह कुफ्र तोलते हैं,
क्योंकि मर्द के बच्चे ही, जय श्री राम बोलते हैं,
सनातन की है सुनामी, इसमें चलो खो जाते हैं,
भगवा पहन के राजू, उत्तम चलो हो जाते हैं,
हिंदू हैं हम और गर्व हमें अपनी, इस पहचान पे,
हम हैं दीवाने - दीवाने श्रीराम के।
हम हैं दीवाने - दीवाने श्रीराम के।
गायक व लेखक- राजू उत्तम