बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार , उसके लिए खुल जाते हैं वैकुंठ के भी द्वार

बिहारी जी के दर पे , जाता जो एक बार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

कुंज गली में बेठे , बांके बिहारी ,
महिमा उनकी है , सबसे न्यारी ,
कुंज गली में बेठे , बाके बिहारी ,
महिमा उनकी है , सबसे न्यारी ,
जो भी जाता दर पे , हो जाता भव से पार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

बिहारी जी के दर पे , जाता जो एक बार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

चाहे वो राजा हो , या हो भिखारी ,
सब पे कृपा करते, बाके बिहारी ,
चाहे वो राजा हो , या हो भिखारी ,
सब पे कृपा करते, बांके बिहारी ,
पल भर में ही सबकी , नय्या लगाते पार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

बिहारी जी के दर पे , जाता जो एक बार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

बिन मांगे वो , सब कुछ देते है ,
भक्तो की खाली झोली, वो भर देते है ,
बिन मांगे वो , सब कुछ देते है ,
भक्तो की खाली झोली, वो भर देते है ,
अपने भक्तो पर वो , लुटाते है भंडार,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

बिहारी जी के दर पे , जाता जो एक बार ,
उसके लिए खुल जाते है , वैकुंठ के भी द्वार ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

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