जय हो जय हो तेरी माँ ज्वाला
( अकबर को, अपनी ताकत पर, बड़ा गुरुर था,
सत्ता के नशे में, शहनशाह चूर था ।
आया था, माँ की ज्योत, बुझाने को वो मगर,
मध्यम हुआ, ज़रा भी ना, ज्योति का नूर था ॥)
सुन लो, सच्ची ये कहानी ।
भक्तो, तुम मेरी, जुबानी ।
ना तो, लोहा, और ना पानी ।
बुझा, पाए थे, ज्योत नूरानी ।
देख हुई, अकबर को हैरानी ।
शर्म से, हो गया, पानी पानी ।
वो बोला, ज्योति का, नूर आला,
जय हो जय हो, तेरी माँ ज्वाला,
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
हो मईया, तूँ है, बड़ी महान ।
तेरी, जग में, ऊंची शान ॥
तेरा, रूतबा है, सबसे निराला,
जय हो जय हो, तेरी माँ ज्वाला,
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
था, बड़े ही, अहंकार, में वो अकबर ।
बोला, है क्या, कोई जग में, मुझसे बढ़कर ।
सवा, मन का, मै लाया, सोने का छत्तर ।
फिर, छतर पर, पडी माँ की, तिरछी नज़र ।
देखा, सोने, का जो रंग ।
रह, गए थे, सभी दंग ॥
ऐसी, धातु में, माँ ने, बदल डाला,
जय हो जय हो, तेरी माँ ज्वाला,
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
चीर, पर्वत की, छाती को, निकली है ये ।
और बिना, तेल बाती के, जलती है ये ।
अपने, भक्तो के, दुःख दर्द, हरती है ये ।
सोई, किस्मत, को उनकी, बदलती है ये ।
प्रेमी, नाम, ले जो तेरा ।
मिटे, लचक अँधेरा ॥
उनके, जीवन में, करती उजाला,
जय हो जय हो, तेरी माँ ज्वाला,
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
( जय हो, जय हो माँ, जय हो माँ )
जय हो, माँ ज्वाला...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल