रह रह ज़िया घबराए
रह रह, ज़िया घबराए,
सखी री मन, मोहन ना आए --
मोहन, ना आए मन, मोहन ना आए ॥
रह रह, ज़िया घबराए, सखी री मन...
भूल, गए, मथुरा में जाकर... ॥
कुब्जा, के संग, प्रीत लगा कर... ॥
कौन, उन्हें समझाए,
सखी री मन, मोहन ना आए ॥
रह रह, ज़िया घबराए, सखी री मन...
तुम, स्वामी, घट घट के वासी... ।
हम है, दर्शन, के अभिलाषी... ॥
नैनन, नीर बहाए,
सखी री मन, मोहन ना आए ॥
रह रह, ज़िया घबराए, सखी री मन...
कौन सी, ऐसी, भूल हमारी... ।
काहे, भुला दिए, बाँके बिहारी... ॥
निशदिन, याद, सताए,
सखी री मन, मोहन ना आए ॥
रह रह, ज़िया घबराए, सखी री मन...
उधो, ज्ञान, सिखावन आए... ।
मोहन, का वो, संदेशा लाए... ॥
लिख लिख, योग पढा़ए,
सखी री मन, मोहन ना आए ॥
रह रह, ज़िया घबराए, सखी री मन...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल