कहा से आई री गुजरियाआज तु रंगीली होली खेल के

धून:- मेरे सावरे कहनैया, तु तो बड़ो चित चोर रे

शीर्षक:- कहा से आई री गुजरिया, आज तु रंगीली होली खेल के

कहा से आई री गुजरिया, आज तु रंगीली होली खेल के
आई री गुजरिया आई री गुजरिया आई री गुजरिया
कहा से आई री......

  लाल लाल गालन के ऊपर रंग चुचाए रयो है
  मस्त प्रेम को नशा तेरी आँख पे छाए रयो है
  भौहें हो रही हैं गुलबिया, आज तु रंगीली होली खेल के
  कहा से आई री....

  होली के हुड़दंग रंग मे भीज रही क्यु गौरी
  रंग डालो काउ रंग रसिया ने करके जोरा जोरि
  तेरी भीगी हैं जुल्फिया, आज तु रंगीली होली खेल के
  कहा से आई री.......

  अछयो गई मैं दही बेचवे घर से आज अकेली
  घेर लई मैं रंग रसिया ने संग ग्वालन की टोली
  मेरी भीजी है चुंदरिया, आज तु रंगीली होली खेल के
  कहा से आई री........

विष्णु भैया जी श्याम सखा
सम्पर्क सूत्र:- 7500580057

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