जब जब रात का साया जग में गहरा होता है

जब जब रात का साया जग में गहरा होता है
श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

चौराहों पर तंत्र मंत्र की जब भी पढ़ती छाया है
मैया के रहते किसी का बुरा नहीं हो पाया है
हर गली कूचे में मां का डेरा होता है
श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

कर्म की मारी भटकी रुहैं जब भी रात को रोती है
कोई नहीं होता जब पास में काली मां ही होती है
उनको मां के आंचल में ही सोना होता है
श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

तांत्रिकों ने काली मां को अपना गुरु ही माना है
महाकाल की महाकाली का भेद ना कोई जाना है
गल मुंडो की माल भुजा का लहंगा होता है
श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

चार कूट और दसों दिशाओं में मां का रूप विकराल है
नैनों में लेकर के ममता चले पवन की चाल है
मैया का भक्तों से रिश्ता गहरा होता है
श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

download bhajan lyrics (180 downloads)