मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली हैं, मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली हैं,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो फूल सुहाने , वो कलिया सुहानी ,
मुझे लगती प्यारी , वो गलिया सुहानी ,
उन गलियों में श्याम की , खुशबू घुली है ,
मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो श्याम का दर्शन , वो श्याम की आंखें ,
जो करती है अपने, भक्तों से बातें ,
मेरी श्याम से जब से, आंखें मिली है ,
मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है ,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

वो राधा का मोहन , वो मीरा का मोहन ,
वो जिसके लिए , मीरा बन गई थी जोगन ,
मुझे भी लगन , मीरा जैसी लगी है ,
मुझे लगती प्यारी , वो कुंज गली है ,

मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है ,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

श्रेणी