जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

धुन : आनंद ही आनंद बरस रहा

जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

सेवाकुंज वारी के जो गुण गावे
नित उठ मंगला दर्शन पावे
कर दर्शन पावे परमानंद, जय जय श्री वृन्दावन--

हरिवंश नाम जो जाप करे
हित चौरासी का पाठ करे
राधावल्लभ रहें उसके अंग संग, जय जय श्री वृन्दावन--

महाप्रसाद से जो जन करे प्रीति
मिल जावे सहज प्रेम रस रीति
छूट जावें जग के सबरे फंद, जय जय श्री वृन्दावन--

साधु सेवा संतन संग कीजै
पावन श्री यमुना जल पीजै
मिल जावें "मधुप" राधा ब्रजचंद, जय जय श्री वृन्दावन--

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