माँ बाप तक गवां दिया,
दलितों का सर उठा दिया,
अर्धांगिनी भी ना रही,
एक एक रतन लूटा दिया।
इतने बड़े त्याग से हैरान कर गये,
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।
कितना दर्द समाज की खातिर वो जर गये,
कितना दर्द समाज की खातिर वो जर गये।
बच्चे नादान चार थे,
बे इलाज मर गए,
शिक्षित मेरा समाज हो,
फरमान कर गये।
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये,
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।
चिंता ना की औलाद की, सब कुछ गवां दिया,
चिंता ना की औलाद की, सब कुछ गवां दिया।
लेकिन दलित समाज का रुतबा बना दिया,
जी पाए हम भी शान से,
संविधान भर गये।
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये,
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।
अब पूजते अंबेडकर, पहले खबर ना ली,
अब पूजते अंबेडकर, पहले खबर ना ली।
जीते जी उस महान की हमने कदर ना की,
फिर भी वो राही कौम का,
सम्मान कर गये।
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये,
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये,
अंबेडकर औलाद भी कुर्बान कर गये।