भानुं घर बाजी आज बधाई, प्रेम रूप अवतार राधिका, बरसाने में आई

भानुं घर बाजी आज बधाई, प्रेम रूप अवतार राधिका, बरसाने में आई ।।

हरि-प्रिया गोलोक भवानी, दिव्यरूपा शोभा की खानी,
पराशक्ति भगती महारानी, वेद पुराण बखान करें गुण, थाह नारद न पाई-भानुं घर.

कीर्ति कुंवरी भानुं दुलारी, गौर बदन, चंदा सी प्यारी,
आलौकिक कन्या सुकुमारी, मुख मंडल पर तेज निराला, दरस परम सुखदाई-भानुं घर.

पलनां में पड़ी गोप-किशोरी, मृगनयनी चंचल रस-भोरी,
अंग अंग रंग-रस विभोरी, बिखरी मधुर सुगुन्ध गगन में, महक उठी पुरवाई-भानुं घर.

संपदा के घन गर्ज रहे हैं, चंदन केसर बरस रहे हैं, जन गण मन सब हर्ष रहे हैं,
झूम झूमकर नाचे 'मधुप' मन, बाज रही, शहिनाई-भानुं घर.