बचपन से सुना

बचपन से सुना हमने मालिक तू हमारा है,
घर पे आई मुशीबत तो दिया तूने सहारा है,
बचपन से सुना हमने मालिक तू हमारा है,

लोरियों की जगह हम श्याम तेरे भजनो को सुनते थे,
सुन कर तेरे पर्चो को सपने येही भूनते थे,
हम को भी उभारो गे जैसे सबको उभरा है,
घर पे आई मुशीबत तो दिया तूने सहारा है,

तूफ़ान जो नहीं आता हम खुद ही सम्बल जाते,
हारे के सहारे हो कैसे हम समज पाते,
डोली जब नाव मेरी बन के आया किनारा है,
घर पे आई मुशीबत तो दिया तूने सहारा है,

तुम हो या नहीं ये भी कहते हुए देखा है,
तुझे भक्तो की आँखों से बेह्ते हुए देखा है,
जीत बन कर के आया तू जब भी राज हारा है,
घर पे आई मुशीबत तो दिया तूने सहारा है,

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