माए नी कुंडा खोलदेmaaye ni kunda kholde


दीद कारन नू असी आए, सत्संगी सन्यासी आए,
द्वार तेरे नू ढोल्दे, माए नी कुंडा खोलदे।

बड़े डराउने बैंक गमां दे, भड़क रहे ते कड़क रहे,
दुःख दे मारे भगत बैचारे द्वार ते बैठे तड़फ रहे।
मारदी है मजबूरी हल्ले, नैन तां रो रो हो गए चल्ले,
पारे वांगु डोल्दे, माए नी कुंडा खोलदे॥

पैरां दे विच दिसदे छले, थक के हो गए चूर बड़े,
बिना दर्ष दे पीडां देंदे, सीना विच्च माँ सूर बड़े।
मुख ते उड़न हवाईया माए, बच्चे देन दुहाईयाँ माए,
मूहों कुछ तां बोल दे, माए नी कुंडा खोलदे॥

असीं गुनाहां दे हाँ पुतले, माए नी भूलन हारे आ,
गुस्सा छडदे आखिर माए तेरे आँख दे तारे आ।
हे अम्बे निर्दोष भवानी हे जगदेव जगकल्यानी,
प्यार दा अमृत घोलदे, माए नी कुंडा खोल दे॥

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