साई सुन ले मेरे दिलदार नहीं सहनी जुदाई

अब जीना है दुश्वार तेरे बिन साई,
साई सुन ले मेरे दिलदार नहीं सहनी जुदाई,
जब थाम को इक रात क्यों दुरी बड़ाई
साई सुन ले मेरे दिलदार नहीं सहनी जुदाई,

तेरे बिना हर पल मेरा दिल यु जलता है,
सेह्ता रहे सितम तो पत्थर भी पिगलता है,
जब कही राहो में मुझको अक्ष तेरा मिलता है,
तेरा ये दीवाना अब तो उस तरफ ही छिलता है,
कर खुद से ही तकरार तेरी याद यु आई,
साई सुन ले मेरे दिलदार नहीं सहनी जुदाई,


गमो ने लुटा जैसा जैसे लुटे इक दरिंदा है,
ज़िंदगानी अब तो मेरी मुझसे शर्मिंदा है,
जी रहा हु जैसे कैद में परिंदा है,
धड़कने तो रुक गई कब की सांसे ये जिन्दा है,
सुन जखमो को हर बार क्या सजा है पाई,
साई सुन ले मेरे दिलदार नहीं सहनी जुदाई,

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